
रायपुर, 6 अगस्त 2026, 8.10 pm : पूर्व प्रधानमंत्री स्व.चंद्रशेखर की जन्म शताब्दी पर आज रायपुर में आयोजित संगोष्ठी में उन्हें आत्मीयता पूर्वक याद किया । सामूहिक संवाद में यह बात उभरकर आई कि प्रखर वक्ता, विद्वान राजनीतिज्ञ और जमीनी जुड़ाव की छवि के प्रतिरूप चंद्रशेखर जी के विचार आज पहले से अधिक प्रासंगिक हैं । संसदीय सवालों और लोकतंत्र की रक्षा के नायक रहे ऐसे व्यक्तित्व की भावना का जितना अधिक प्रसार होगा उतना ही देश मजबूत होगा ।
चंद्रशेखर जन्मशती समारोह समिति के इस आयोजन में प्रदेश और देश के अनेक हिस्सों से आए विचारक मौजूद थे । आयोजन में विशेष रूप से आए रमाशंकर सिंह, पूर्व मंत्री ने विस्तार से अपनी बातें रखते कहा कि हर सवाल का स्वागत करना चाहिए । चंद्रशेखरजी असहमति और विमर्श के लीडर थे । लोकतंत्र की आत्मा सहभागिता, असहमति में और सबसे बढ़ कर नागरिक बोध को बढ़ाने में है । दुर्भाग्य से आज राजनीतिक दल खुद में लोकतंत्र को लागू नहीं करते लेकिन देश में लोकतंत्र की बात कहते हैं । समाजवाद की परिभाषा उनके मुताबिक “बराबरी और समृद्धि” थी। आज विचार पीछे और नेता आगे हैं ।
आयोजन में अध्यक्षीय उद्बोधन देते वरिष्ठ सामाजसेवी आनंद मिश्रा जी ने कहा कि आज तानाशाही का वही विरोध कर सकता है जो इमरजेंसी का विरोध कर सकता है । आज शिक्षा और स्वास्थ्य को लेकर सबसे अधिक लूटा जा रहा है । जो इस आग को सुलगा सके वही सबसे बड़ा नेता होता है । हमें भावनाओं में बहने की बजाय तुलनात्मक अध्ययन का साहस पैदा करें ।

आरम्भ में समाजवादी नेता अरुण श्रीवास्तव, राष्ट्रीय संयोजक [ चंद्रशेखर जन्मशती समारोह समिति ] ने कुछ खुलासे करते हुए बताया कि विचारधारा जीवित क्यों रहनी चाहिए । समाजवादियों की जन्मशताब्दी मनाई जाए, जोर-शोर से मनाई जानी चाहिए । देश भर में सौ आयोजनों की परिकल्पना की गई । नई पीढ़ी को चंद्रशेखर जी के बारे में बताया जाए एक उद्देश्य तो यही है ।

इस आयोजन में “विचार संवाद” के रूप में आयोजन में मौजूद कुछ अन्य साथियों ने भी अपने विचार व्यक्त किए जिनमें प्रमुख थे — गौतम बंधोपाध्याय , एच. एस. मिश्रा, मनमोहन सिंह सैलानी, विनोद वर्मा, सुरेंद्र शर्मा, विनय सिंह, और पद्मश्री मदन चौहान ।

आरम्भ में एक डॉक्यूमेंट्री के माध्यम से चंद्रशेखर जी के व्यक्तित्व की समूल बानगी देखी गई । आयोजन का संयोजन और संचालन किया मनमोहन अग्रवाल ने ।