
रायपुर, 4 सितंबर 2026, 8.35 pm : विशेष संवाददाता:
सिविल लाइंस स्थित सर्किट हाउस में लोक निर्माण विभाग (PWD) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं । आरोप है कि विभाग द्वारा ठीक-ठाक स्थिति में मौजूद रिसेप्शन और कॉन्फ्रेंस हॉल को अनावश्यक रूप से तोड़कर नए निर्माण का काम कराया जा रहा है, जिससे सरकारी खजाने पर लाखों रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है ।
एक ओर जहां मौजूदा सुविधाओं को तोड़कर नए निर्माण पर खर्च किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसी विश्राम गृह में जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और आम नागरिकों के लिए उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं की स्थिति बदहाल है ।
सर्किट हाउस परिसर में संचालित इंडियन कॉफी हाउस में चाय, कॉफी, पानी की बोतल और भोजन की कीमतें कई सितारा होटलों के स्तर तक पहुंच गई हैं, लेकिन इसके मुकाबले बैठक व्यवस्था बेहद अव्यवस्थित है । हॉल में क्षमता से अधिक कुर्सियां ठूंस-ठूंसकर लगाई गई हैं । न लोगों के बैठने के लिए पर्याप्त जगह है और न ही आने-जाने की ।
स्थिति इतनी खराब है कि लोगों को अक्सर एक-दूसरे से टकराना पड़ता है और धक्का-मुक्की जैसी स्थिति बनी रहती है । सवाल यह भी है कि खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता की जिम्मेदारी संभालने वाला शासन का खाद्य विभाग आखिर इस अव्यवस्था पर कब संज्ञान लेगा ?
खाने की थाली में टपक रहा गंदा पानी !
सबसे गंभीर और चिंताजनक मामला स्वास्थ्य एवं स्वच्छता से जुड़ा है । इंडियन कॉफी हाउस के हॉल की छत से पिछले कई दिनों से गंदा पानी रिस रहा है । आरोप है कि ऊपर स्थित कमरों से निकलने वाला गंदा पानी छत के रास्ते नीचे हॉल में बैठे लोगों और उनकी खाने की थालियों तथा व्यंजनों पर सीधे टपक रहा है । यह स्थिति न केवल बेहद शर्मनाक है, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा पैदा कर सकती है ।


इतना ही नहीं, कॉफी हाउस के ऊपर स्थित पानी की टंकी की लंबे समय से सफाई नहीं होने की बात भी सामने आई है । यदि यह स्थिति सही है, तो पेयजल की स्वच्छता को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े होते हैं ।
शिकायतों के बावजूद PWD बेखबर? कॉफी हाउस कर्मचारियों के अनुसार, छत से पानी रिसने और पानी की टंकी की सफाई को लेकर कई बार PWD अधिकारियों को शिकायत की जा चुकी है, लेकिन अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ है ।
कर्मचारियों का यह भी कहना है कि सर्किट हाउस से जुड़ी अन्य समस्याओं और अव्यवस्थाओं को लेकर पूर्व में भी शिकायतें की गई हैं, लेकिन विभागीय अधिकारियों की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई ।
एक तरफ सरकारी धन से ठीक-ठाक सुविधाओं को तोड़कर नए निर्माण पर लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उसी परिसर में आम लोगों को गंदा पानी, अव्यवस्था और अस्वच्छ वातावरण में भोजन करने को मजबूर होना पड़ रहा है ।
सवाल सीधा है—सरकारी धन की प्राथमिकता क्या है: जरूरतमंद सुविधाओं का सुधार या अनावश्यक तोड़फोड़ और निर्माण ?